नीतिवचन 15:30
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आंखों की चमक से मन को आनन्द होता है,
1 यूहन्ना 2:5
·
पर जो कोई उसके वचन पर चले, उस में सचमुच परमेश्वर का प्रेम सिद्ध हुआ है:
हमें इसी से मालूम होता है, कि हम उस में हैं।
1 यूहन्ना 2:16
·
क्योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात शरीर की अभिलाषा, और आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्तु संसार ही की ओर से है।
1 यूहन्ना 2:17
·
और संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते
हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा॥
याकूब 1:15
·
फिर अभिलाषा गर्भवती होकर पाप को जनती है और
पाप जब बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्पन्न करता है।
याकूब 4
1
तुम में लड़ाइयां और
झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों
में लड़ते-भिड़ते हैं?
2
तुम लालसा रखते हो, और तुम्हें मिलता नहीं; तुम हत्या और डाह करते
हो, ओर कुछ प्राप्त नहीं
कर सकते; तुम झगड़ते और लड़ते
हो; तुम्हें इसलिये नहीं
मिलता, कि मांगते नहीं।
3
तुम मांगते हो और पाते
नहीं, इसलिये कि बुरी इच्छा
से मांगते हो, ताकि अपने भोग विलास
में उड़ा दो।
4
हे व्यभिचारिणयों, क्या तुम नहीं जानतीं, कि संसार से मित्रता
करनी परमेश्वर से बैर करना है सो जो कोई संसार का मित्र होना चाहता है, वह अपने आप को परमेश्वर
का बैरी बनाता है।
5
क्या तुम यह समझते
हो, कि पवित्र शास्त्र
व्यर्थ कहता है जिस आत्मा को उस ने हमारे भीतर बसाया है, क्या वह ऐसी लालसा
करता है, जिस का प्रतिफल डाह
हो?
उत्पत्ति 3:6
·
सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने
में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया;
मत्ती 5:27
·
तुम सुन चुके हो कि कहा गया था, कि व्यभिचार न करना।
मत्ती 5:28
·
परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि जो कोई किसी स्त्री पर कुदृष्टि डाले वह
अपने मन में उस से व्यभिचार कर चुका।
अय्यूब 31
|
मैं ने अपनी आंखों के विषय वाचा बान्धी है, फिर मैं किसी कुंवारी पर क्योंकर आंखें लगाऊं? |
नीतिवचन 27:20
·
जैसे अधोलोक और विनाशलोक, वैसे ही मनुष्य की आंखें भी तृप्त नहीं होती।
कुलुस्सियों 3:5
·
इसलिये अपने उन अंगो को मार डालो, जो पृथ्वी पर हैं, अर्थात व्यभिचार, अशुद्धता, दुष्कामना, बुरी लालसा और लोभ
को जो मूर्ति पूजा के बराबर है।
कुलुस्सियों 3:6
·
इन ही के कारण परमेश्वर का प्रकोप आज्ञा न
मानने वालों पर पड़ता है।
यूहन्ना 20:29
·
यीशु ने उस से कहा, तू ने तो मुझे देखकर विश्वास किया है, धन्य वे हैं जिन्हों ने बिना देखे विश्वास
किया॥
यूहन्ना 6:46
·
यह नहीं, कि किसी ने पिता
को देखा परन्तु जो परमेश्वर की ओर से है, केवल उसी ने पिता
को देखा है।
यूहन्ना 1:18
·
परमेश्वर को किसी ने कभी नहीं देखा, एकलौता पुत्र जो पिता की गोद में हैं, उसी ने उसे प्रगट किया॥
11
हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए।
12
परमेश्वर को कभी किसी
ने नहीं देखा; यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है; और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है।
13
इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्योंकि उस ने अपने
आत्मा में से हमें दिया है।
मत्ती 13;14
और उन के विषय में
यशायाह की यह भविष्यद्ववाणी पूरी होती है, कि तुम कानों से तो सुनोगे, पर समझोगे नहीं; और आंखों से तो देखोगे, पर तुम्हें न सूझेगा।
15
क्योंकि इन लोगों का
मन मोटा हो गया है, और वे कानों से ऊंचा सुनते हैं और उन्होंने अपनी
आंखें मूंद लीं हैं; कहीं ऐसा न हो कि वे आंखों से देखें, और कानों से सुनें और मन से समझें, और फिर जाएं, और मैं उन्हें चंगा
करूं।
2 कुरिन्थियों4;4
और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के
ईश्वर ने अन्धी कर दी है,
ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश
उन पर न चमके।
5
क्योंकि हम अपने को नहीं, परन्तु मसीह यीशु को प्रचार
करते हैं, कि वह प्रभु है;
और अपने विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे
सेवक हैं।
6
इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिस ने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके;
और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान
की
ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो॥
इफिसियों 1:17
·
कि हमारे प्रभु यीशु मसीह का परमेश्वर जो महिमा
का पिता है, तुम्हें अपनी पहचान में, ज्ञान और प्रकाश का आत्मा दे।
इफिसियों 1:18
·
और तुम्हारे मन की आंखें ज्योतिर्मय हों कि तुम
जान लो कि उसके बुलाने से कैसी आशा होती है, और पवित्र लोगों
में उस की मीरास की महिमा का धन कैसा है।
2 कुरिन्थियों 4:18
·
और हम तो देखी हुई वस्तुओं को नहीं परन्तु
अनदेखी वस्तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई
वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी
वस्तुएं सदा बनी रहती हैं।
2 कुरिन्थियों 5:7
·
क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं।
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